बेनाम रिश्ता


कैसे  समझाये क्या है रिश्ता हमारा,
कौन समझेगा इस रिश्ते को,
कुछ ना होकर भी बहुत कुछ है हमारा ,
ना है जन्मों का बंधन, ना है खून का रिश्ता,
कौन समझेगा क्या है रिश्ता हमारा,
बस एहसासों की एक डोर से बंधा है ये रिश्ता,
जिसे टूटने का डर भी सताता है,
यूँ  हमारे ख्वाबों में रहता है उनका आना जाना,
दुनिया के नजरों से परे बेनाम सा रिश्ता है हमारा,
मोहब्बत और दोस्ती से भी बढ़कर है ,
ये बेनाम सा रिश्ता हमारा,
मैं असमंजस में हूँ आखिर ये बेनाम सा रिश्ता का क्या नाम दिया जाये।।✍️✍️✍️✍️✍️✍️

Comments