नारी को बदनाम कर दिया तनिक भी शर्म ना आयी तुम्हें।। देख तुम्हारी कायरता आज नारी शक्ति भी लजाई है।। जिसनें अपनी जान की परवाह ना किये बिना तुम्हारी जान बचाई थी।। आज तुमनें उनपर ही पत्थरों की बरसात कर अपनी मूर्खता दिखायी है।। क्या तुम्हें ऐसा करने में तनिक भी दया ना आई थी ।। नारी प्रतीक है दया ममता की आज तुमनें इन्हें भी गलत साबित कर दिखाई है।। मुरादाबाद✍️😢😢
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बेनाम रिश्ता कैसे समझाये क्या है रिश्ता हमारा, कौन समझेगा इस रिश्ते को, कुछ ना होकर भी बहुत कुछ है हमारा , ना है जन्मों का बंधन, ना है खून का रिश्ता, कौन समझेगा क्या है रिश्ता हमारा, बस एहसासों की एक डोर से बंधा है ये रिश्ता, जिसे टूटने का डर भी सताता है, यूँ हमारे ख्वाबों में रहता है उनका आना जाना, दुनिया के नजरों से परे बेनाम सा रिश्ता है हमारा, मोहब्बत और दोस्ती से भी बढ़कर है , ये बेनाम सा रिश्ता हमारा, मैं असमंजस में हूँ आखिर ये बेनाम सा रिश्ता का क्या नाम दिया जाये।।✍️✍️✍️✍️✍️✍️