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मेरी कलम

     मेरी कलम मेरी अरमान है, मेरी शान है, मेरी कलम मेरी पहचान है।। मेरा विश्वास है, मेरी भक्ति है, मेरी कलम मेरी शक्ति है।। मेरी ताज है, मेरा हमराज है, मेरी कलम मेरी आवाज है।। मेरा मित्र है, मेरा साथी है, मेरी कलम मेरा हमराही है।। मेरी आह है, मेरे मन की भाव है, मेरी कलम मेरी जज्बात है।। मेरी उम्मीद है, मेरे भविष्य की आधारशिला है, मेरी कलम मेरे हौसलें की उड़ान हैं।।। गुड़िया कुमारी पुर्णिया बिहार
नारी को बदनाम कर दिया तनिक भी शर्म ना आयी तुम्हें।। देख तुम्हारी कायरता आज नारी  शक्ति भी लजाई है।। जिसनें अपनी जान की परवाह ना  किये बिना तुम्हारी जान बचाई थी।। आज तुमनें उनपर ही पत्थरों की बरसात कर अपनी मूर्खता दिखायी है।। क्या तुम्हें ऐसा करने में तनिक भी दया ना आई थी ।। नारी प्रतीक है दया ममता की आज  तुमनें इन्हें भी गलत साबित कर दिखाई है।।               मुरादाबाद✍️😢😢
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           बेनाम रिश्ता कैसे  समझाये क्या है रिश्ता हमारा, कौन समझेगा इस रिश्ते को, कुछ ना होकर भी बहुत कुछ है हमारा , ना है जन्मों का बंधन, ना है खून का रिश्ता, कौन समझेगा क्या है रिश्ता हमारा, बस एहसासों की एक डोर से बंधा है ये रिश्ता, जिसे टूटने का डर भी सताता है, यूँ  हमारे ख्वाबों में रहता है उनका आना जाना, दुनिया के नजरों से परे बेनाम सा रिश्ता है हमारा, मोहब्बत और दोस्ती से भी बढ़कर है , ये बेनाम सा रिश्ता हमारा, मैं असमंजस में हूँ आखिर ये बेनाम सा रिश्ता का क्या नाम दिया जाये।।✍️✍️✍️✍️✍️✍️
.......हमारे युग का प्यार•••• अपनो से जुदा करता है ,माँ बाप को ख़फ़ा करता है। हमारी मंजिल को हमसे छिनता है, गैरो पे विश्वास करना सिखाता है। यही है हमारे युग का प्यार, यही है..................... रात रातभर जागना सिखाता है, अपने ही दोस्तो से नफरत करना सिखाता है। किताबों को हमसे दूर करता है मोबाइल के नजदीक हमें ये लाता है। यही है हमारे युग का प्यार, यही है.................... आई लव यू कह के जताया जाता है, बिन कहे कुछ समझ नही पाता है। जो चेहरे की सुंदरता से हो जाता है, मन की सुंदरता को पहचान नही पता है। यही है हमारे युग का प्यार, यही है.......... जो करता हो वादे जीवन भर साथ निभाने का बीच सफर में ही साथ छोड़कर चला जाता हो। जो बस गुलाब की पंखुड़ियों से मिलाता हो काँटो से रूबरू ना कराता हो। जो दो परिवार को तोड़कर बस दो दिल को  मिलता है । यही है हमारे युग का प्यार, यही है.......                             Guriya kumari.
  """"क्या हवाएं भी बात करती है"" बैठी थी जब मैं आज तनहाइयों में  तभी हवा के झोंके ने मेरे मन में झांका धीमी धीमी आवाज  में बोली मेरे अंतर्मन से क्या सोच रही है तू क्यों तू रहती है इतना परेशान कुछ बातें मुझसे भी तो कर तुझ से बतियाने की है चाहत मुझमें जो तेरी खामोशी को  पहचाने क्या कोई है तेरा  ऐसा.....???  चल नहीं है तो दो बात मुझसे ही कर लें हूँ मैं  दर्पण तेरी दर्पण से क्यों है तू  छुपती यहां तो सब है सच  आवाज सुन खुद से तो कह  तू बन वही जो तू खुद है क्यों तू आज और कल के द्वंद में खुद को भुला बैठी है क्यों झूठी मुस्कान में सब को झुठला बैठी है।।  तभी टूटी अचानक    मेरी  निंद्रा फिर हौठो पर झूठी मुस्कान आई  रोका दिल को और खुद से बोली  क्या हवाएं भी कभी बात करती है।।।।।।।